भरणी नक्षत्र — स्वामी शुक्र, देवता यम और नाम अक्षर
- क्रम
- 2 / 27
- विस्तार
- 13°20′ मेष – 26°40′ मेष
- स्वामी
- शुक्र
- देवता
- यम
- गण
- मनुष्य
- योनि
- गज (हाथी)
- नाड़ी
- मध्य
- स्वभाव
- उग्र
उग्र: साहस और परिश्रम के कामों के लिए ठीक; शुभ आरंभ के लिए परंपरा में इसे टाला जाता है।
चार चरण और उनके नाम अक्षर
हमारे मुहूर्त नियमों में
भरणी उन नक्षत्रों में नहीं है जिन्हें हमारे नियम विवाह, गृह प्रवेश, प्रॉपर्टी, नामकरण या व्यापार शुरू करने के लिए लेते हैं।
चंद्रमा अगली बार भरणी में कब
- 05:41 PM, 26 अक्टूबर से 03:39 PM, 27 अक्टूबर तक
- 04:15 AM, 23 नवंबर से 02:02 AM, 24 नवंबर तक
समय भारतीय समय में, पंचांग से (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश)। चंद्रमा का नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण में बदलता है; केवल घड़ी का समय अलग होता है। आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, राहु काल →
सभी 27 नक्षत्र
1. अश्विनी3. कृत्तिका4. रोहिणी5. मृगशिरा6. आर्द्रा7. पुनर्वसु8. पुष्य9. आश्लेषा10. मघा11. पूर्वा फाल्गुनी12. उत्तरा फाल्गुनी13. हस्त14. चित्रा15. स्वाति16. विशाखा17. अनुराधा18. ज्येष्ठा19. मूल20. पूर्वाषाढ़ा21. उत्तराषाढ़ा22. श्रवण23. धनिष्ठा24. शतभिषा25. पूर्वा भाद्रपद26. उत्तरा भाद्रपद27. रेवती
और देखें
आपका जन्म नक्षत्र और चरण जन्म के समय और स्थान से निकलता है। अपनी कुंडली में मुफ़्त देखें।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ बिना लॉगिन आज़माएँ