ज्येष्ठा नक्षत्र — स्वामी बुध, देवता इंद्र और नाम अक्षर
- क्रम
- 18 / 27
- विस्तार
- 16°40′ वृश्चिक – 30°00′ वृश्चिक
- स्वामी
- बुध
- देवता
- इंद्र
- गण
- राक्षस
- योनि
- मृग (हिरण)
- नाड़ी
- आदि
- स्वभाव
- तीक्ष्ण
तीक्ष्ण: कठिन फ़ैसलों और पुरानी चीज़ें समाप्त करने के लिए ठीक; नए शुभ कामों के लिए परंपरा में इसे टाला जाता है।
चार चरण और उनके नाम अक्षर
| चरण | चंद्र राशि | नाम अक्षर |
|---|---|---|
| 1 16°40′ वृश्चिक | वृश्चिक | नो |
| 2 20°00′ वृश्चिक | वृश्चिक | या |
| 3 23°20′ वृश्चिक | वृश्चिक | यी |
| 4 26°40′ वृश्चिक | वृश्चिक | यू |
ज्येष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर →
ज्येष्ठा छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है (जल और अग्नि राशियों के संधि स्थान पर)। इस नक्षत्र में जन्म के बाद कई परिवार सरल गंडमूल शांति कराते हैं; यह एक परंपरा है, बच्चे के बारे में भविष्यवाणी नहीं।
हमारे मुहूर्त नियमों में
ज्येष्ठा उन नक्षत्रों में नहीं है जिन्हें हमारे नियम विवाह, गृह प्रवेश, प्रॉपर्टी, नामकरण या व्यापार शुरू करने के लिए लेते हैं।
चंद्रमा अगली बार ज्येष्ठा में कब
- 04:03 AM, 15 अक्टूबर से 06:47 AM, 16 अक्टूबर तक
- 11:38 AM, 11 नवंबर से 02:18 PM, 12 नवंबर तक
समय भारतीय समय में, पंचांग से (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश)। चंद्रमा का नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण में बदलता है; केवल घड़ी का समय अलग होता है। आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, राहु काल →
सभी 27 नक्षत्र
1. अश्विनी2. भरणी3. कृत्तिका4. रोहिणी5. मृगशिरा6. आर्द्रा7. पुनर्वसु8. पुष्य9. आश्लेषा10. मघा11. पूर्वा फाल्गुनी12. उत्तरा फाल्गुनी13. हस्त14. चित्रा15. स्वाति16. विशाखा17. अनुराधा19. मूल20. पूर्वाषाढ़ा21. उत्तराषाढ़ा22. श्रवण23. धनिष्ठा24. शतभिषा25. पूर्वा भाद्रपद26. उत्तरा भाद्रपद27. रेवती
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