पुनर्वसु नक्षत्र — स्वामी गुरु, देवता अदिति और नाम अक्षर
- क्रम
- 7 / 27
- विस्तार
- 20°00′ मिथुन – 3°20′ कर्क
- स्वामी
- गुरु
- देवता
- अदिति
- गण
- देव
- योनि
- मार्जार (बिल्ली)
- नाड़ी
- आदि
- स्वभाव
- चर (चल)
चर (चल): परंपरा में यात्रा, नए संपर्क और काम आगे बढ़ाने के लिए अच्छा माना जाता है।
चार चरण और उनके नाम अक्षर
पुनर्वसु नक्षत्र के नाम अक्षर →
हमारे मुहूर्त नियमों में
पुनर्वसु इन मुहूर्तों के शुभ नक्षत्रों में है: प्रॉपर्टी ख़रीदने का मुहूर्त, नामकरण मुहूर्त, नया व्यापार शुरू करने का मुहूर्त। तिथि, योग, भद्रा और मास भी देखे जाते हैं।
चंद्रमा अगली बार पुनर्वसु में कब
- 01:29 AM, 4 अक्टूबर से 12:13 AM, 5 अक्टूबर तक
- 07:12 AM, 31 अक्टूबर से 05:39 AM, 1 नवंबर तक
समय भारतीय समय में, पंचांग से (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश)। चंद्रमा का नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण में बदलता है; केवल घड़ी का समय अलग होता है। आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, राहु काल →
सभी 27 नक्षत्र
1. अश्विनी2. भरणी3. कृत्तिका4. रोहिणी5. मृगशिरा6. आर्द्रा8. पुष्य9. आश्लेषा10. मघा11. पूर्वा फाल्गुनी12. उत्तरा फाल्गुनी13. हस्त14. चित्रा15. स्वाति16. विशाखा17. अनुराधा18. ज्येष्ठा19. मूल20. पूर्वाषाढ़ा21. उत्तराषाढ़ा22. श्रवण23. धनिष्ठा24. शतभिषा25. पूर्वा भाद्रपद26. उत्तरा भाद्रपद27. रेवती
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