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धनिष्ठा नक्षत्र — स्वामी मंगल, देवता वसु और नाम अक्षर

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क्रम
23 / 27
विस्तार
23°20′ मकर – 6°40′ कुंभ
स्वामी
मंगल
देवता
वसु
गण
राक्षस
योनि
सिंह (शेर)
नाड़ी
मध्य
स्वभाव
चर (चल)

चर (चल): परंपरा में यात्रा, नए संपर्क और काम आगे बढ़ाने के लिए अच्छा माना जाता है।

चार चरण और उनके नाम अक्षर

चरणचंद्र राशिनाम अक्षर
1
23°20′ मकर
मकरगा
2
26°40′ मकर
मकरगी
3
0°00′ कुंभ
कुंभगू
4
3°20′ कुंभ
कुंभगे

धनिष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर →

हमारे मुहूर्त नियमों में

धनिष्ठा इन मुहूर्तों के शुभ नक्षत्रों में है: नामकरण मुहूर्त, नया व्यापार शुरू करने का मुहूर्त। तिथि, योग, भद्रा और मास भी देखे जाते हैं।

नामकरण मुहूर्त 2026नया व्यापार शुरू करने का मुहूर्त 2026

चंद्रमा अगली बार धनिष्ठा में कब

समय भारतीय समय में, पंचांग से (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश)। चंद्रमा का नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण में बदलता है; केवल घड़ी का समय अलग होता है। आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, राहु काल →

सभी 27 नक्षत्र

1. अश्विनी2. भरणी3. कृत्तिका4. रोहिणी5. मृगशिरा6. आर्द्रा7. पुनर्वसु8. पुष्य9. आश्लेषा10. मघा11. पूर्वा फाल्गुनी12. उत्तरा फाल्गुनी13. हस्त14. चित्रा15. स्वाति16. विशाखा17. अनुराधा18. ज्येष्ठा19. मूल20. पूर्वाषाढ़ा21. उत्तराषाढ़ा22. श्रवण24. शतभिषा25. पूर्वा भाद्रपद26. उत्तरा भाद्रपद27. रेवती

और देखें

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