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अश्विनी नक्षत्र — स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार और नाम अक्षर

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क्रम
1 / 27
विस्तार
0°00′ मेष – 13°20′ मेष
स्वामी
केतु
देवता
अश्विनी कुमार
गण
देव
योनि
अश्व (घोड़ा)
नाड़ी
आदि
स्वभाव
क्षिप्र (लघु)

क्षिप्र (लघु): परंपरा में सीखने, लेन-देन और जल्दी पूरे होने वाले कामों के लिए अच्छा माना जाता है।

चार चरण और उनके नाम अक्षर

चरणचंद्र राशिनाम अक्षर
1
0°00′ मेष
मेषचु
2
3°20′ मेष
मेषचे
3
6°40′ मेष
मेषचो
4
10°00′ मेष
मेषला

अश्विनी नक्षत्र के नाम अक्षर →

अश्विनी छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है (जल और अग्नि राशियों के संधि स्थान पर)। इस नक्षत्र में जन्म के बाद कई परिवार सरल गंडमूल शांति कराते हैं; यह एक परंपरा है, बच्चे के बारे में भविष्यवाणी नहीं।

हमारे मुहूर्त नियमों में

अश्विनी इन मुहूर्तों के शुभ नक्षत्रों में है: नामकरण मुहूर्त, नया व्यापार शुरू करने का मुहूर्त। तिथि, योग, भद्रा और मास भी देखे जाते हैं।

नामकरण मुहूर्त 2026नया व्यापार शुरू करने का मुहूर्त 2026

चंद्रमा अगली बार अश्विनी में कब

समय भारतीय समय में, पंचांग से (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश)। चंद्रमा का नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण में बदलता है; केवल घड़ी का समय अलग होता है। आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, राहु काल →

सभी 27 नक्षत्र

2. भरणी3. कृत्तिका4. रोहिणी5. मृगशिरा6. आर्द्रा7. पुनर्वसु8. पुष्य9. आश्लेषा10. मघा11. पूर्वा फाल्गुनी12. उत्तरा फाल्गुनी13. हस्त14. चित्रा15. स्वाति16. विशाखा17. अनुराधा18. ज्येष्ठा19. मूल20. पूर्वाषाढ़ा21. उत्तराषाढ़ा22. श्रवण23. धनिष्ठा24. शतभिषा25. पूर्वा भाद्रपद26. उत्तरा भाद्रपद27. रेवती

और देखें

आपका जन्म नक्षत्र और चरण जन्म के समय और स्थान से निकलता है। अपनी कुंडली में मुफ़्त देखें।

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